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मंगलवार, 4 सितंबर 2012

सान्निध्य: शिक्षक

सान्निध्य: शिक्षक:   जो शिक्षित करता हम उसको शिक्षक कह सकते हैं। जो दीक्षित करता हम उसको शिक्षक कह सकते है। दिशा दिखाये, दे दृष्‍टांत, आगाह करे,...

सोमवार, 3 सितंबर 2012

अबनीश सिंह चौहान

सान्निध्‍य दर्पण: अबनीश सिंह चौहान: युवा नवगीतकार अवनीश सिंह चौहान को प्रथम कविताकोश 2011 पुरस्‍कार नयी चलन के इस कैफे में प्रथम कविताकोश के लिए प्रशस्ति पत्र औ...

शनिवार, 25 अगस्त 2012

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: साहित्‍यकार-5 में रघुनाथ मिश्र और ‘आकुल’

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: साहित्‍यकार-5 में रघुनाथ मिश्र और ‘आकुल’: निरुपमा प्रकाशन मेरठ की ‘साहित्‍यकार’ प्रकाशन शृंखला की पाँचवी कड़ी में पाँच कवियों में कोटा के वरिष्‍ठ साहित्‍यकार और जनकवि विद्या वाचस्‍प...

मंगलवार, 21 अगस्त 2012

“कोयला भी हैं खाने लगे”

“कोयला भी हैं खाने लगे”

बेईमानी की आंधी चली इतनी जोर से,
कि ईमान के पर्वत भी डगमगाने लगे .

दंभ भरते थे, जो अपने पाक-साफ़ होने का,
वो कदम भी बढ़कर कोठों तक आने लगे .

चारों ओ़र से चुप-चाप चोरी में जो लगे रहे,
देखो आज वही सब, चोर-चोर चिल्लाने लगे.

जन्नत समझ कर जिसे, गए थे लोग वहाँ,
वहाँ जाकर, वही मुकाम उन्हें  कैदखाने लगे

पेट की भूख इतनी बढ़ गई अब 'शैलेश'
देखो, लोग आज कोयला भी हैं खाने लगे.
  

"कुछ कर लो"


"चाँद को निहारने की बात"


"कोयला भी हैं खाने लगे"