जब भी
होली का दिन आता है
वह भिखारी
बडा खुश हो जाता है
क्योंकि
उसी दिन तो वह
फटे-पुराने कपडे पहनकर
समाज में
गले मिल पाता है।
जब भी
होली का दिन आता है
वह भिखारी
बडा खुश हो जाता है
क्योंकि
उसी दिन तो वह
फटे-पुराने कपडे पहनकर
समाज में
गले मिल पाता है।
होली पर हमें
उनका व्यवहार
बहुत भाता है
क्योंकि
हमारा खर्चा बच जाता है
और
रंग डालने के पहले ही
उनका चेहरा
गुस्से से लाल हो जाता है।