(१)
जो शहीद हो गये वतन पर वो कुछ ही अवतार हुये।
उनमें राजगुरू ऊधम और भगतसिंह सरदार हुये॥
निशदिन याद करें हम उनको नित उठ उनको करें नमन॥
जिनके कारण आजादी के स्वप्न सभी साकार हुये॥
(२)
वीर शहीदों की कुर्बानी भूले सुख पाने वाले।
अब तो केवल मौज ले रहे सत्ता में आने वाले॥
भ्रष्टाचार और घोटाले भारत की पहिचान बने,
देश बेच कर खा जायेंगे दुष्ट भ्रष्ट खाने वाले॥
(३)
धर्म कर्म और संस्कार अब नजर न आते।
भोग विलासी लोग हुये सब मजे उडाते॥
मिट्टी में मिल गईं मान मर्यादायें अब,
पैसे प्यार में 'गाफिल' जीवन भर भरमाते॥
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गुरुवार, 19 अप्रैल 2012
मुक्तक
जिन्दगी और मौत का सच जान लेगा जो।
वक्त और इंसान को पहचान लेगा जो॥
जिन्दगी जीयेगा वो ही शान से 'गाफिल',
मौत से मिलने की मन में ठान लेगा जो॥
चाह कर भी जिन्दगी से मिल न पाये।
वक्त के भी साथ में हम चल न पाये॥
हमने जीवन भर छला है हर किसी को,
मौत से हारे उसे हम छल न पाये॥
हम पुजारी सत्य के है कर्म से नाता।
प्रेम और सौहार्द्र का जीना हमें भाता॥
वक्त से कह दो कि दे वो साथ सच का,
झूठ से मिलने कभी भी सच नहीं जाता॥
मौत से डर कर न जी वो एक दिन ही आयेगी।
जिन्दगी के सफर का संग आईना भी लायेगी॥
लाख करना मिन्नतें तेरी सुनेगी वो नहीं,
तू न जाना चाहेगा तो खींच कर ले जायेगी॥
वक्त और इंसान को पहचान लेगा जो॥
जिन्दगी जीयेगा वो ही शान से 'गाफिल',
मौत से मिलने की मन में ठान लेगा जो॥
चाह कर भी जिन्दगी से मिल न पाये।
वक्त के भी साथ में हम चल न पाये॥
हमने जीवन भर छला है हर किसी को,
मौत से हारे उसे हम छल न पाये॥
हम पुजारी सत्य के है कर्म से नाता।
प्रेम और सौहार्द्र का जीना हमें भाता॥
वक्त से कह दो कि दे वो साथ सच का,
झूठ से मिलने कभी भी सच नहीं जाता॥
मौत से डर कर न जी वो एक दिन ही आयेगी।
जिन्दगी के सफर का संग आईना भी लायेगी॥
लाख करना मिन्नतें तेरी सुनेगी वो नहीं,
तू न जाना चाहेगा तो खींच कर ले जायेगी॥
मुक्तक
दिल में दर्द छुपाया हमने चेहरे पर मुस्कान रखी।
प्रथम मिलन में भी जीवन की हमने हर पहचान रखी॥
पुनर्मिलन की आस लिये हम मिले सभी से जीवन में,
विमुख हुये तो भी मर्यादा आन-बान और शान रखी॥
प्यार के हर रंग को स्वीकार कर देखो।
रंग नफरत का सदा दुत्कार कर देखो॥
जिन्दगी भर रंग की बरसात होगी,
प्यार से यदि प्यार का रंग डार कर देखो॥
जिन्दगी जीयो हमेशा मुस्कुराकर।
दर्द को भी देख लो अपना बनाकर॥
प्रेम से बढ़कर नहीं कुछ और जग में,
तोडना मत दिल किसी का दिल लगाकर॥
प्रथम मिलन में भी जीवन की हमने हर पहचान रखी॥
पुनर्मिलन की आस लिये हम मिले सभी से जीवन में,
विमुख हुये तो भी मर्यादा आन-बान और शान रखी॥
प्यार के हर रंग को स्वीकार कर देखो।
रंग नफरत का सदा दुत्कार कर देखो॥
जिन्दगी भर रंग की बरसात होगी,
प्यार से यदि प्यार का रंग डार कर देखो॥
जिन्दगी जीयो हमेशा मुस्कुराकर।
दर्द को भी देख लो अपना बनाकर॥
प्रेम से बढ़कर नहीं कुछ और जग में,
तोडना मत दिल किसी का दिल लगाकर॥
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