ब्लॉग पर पधारने के लिए धन्यवाद। यदि आप कवि या लेखक हैं तो आईए हम आपको मंच प्रदान करते हैं आप “काव्याकाश” से जुड़‌कर अपनी कविताएं, लेख, व्यंग्य, कहानी आदि प्रकाशित कर सकते हैं। अथवा "अनुसरण करें" पर किल्क करके हमसे जुड़ सकते हैं। आज ही ईमेल करें- kavyakash1111@gmail.com
हाइकु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
हाइकु लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 28 जनवरी 2011

तुम्हारे लिए

टकराया था
सारे जमाने से मैं
तुम्हारे लिए।

सच

तुम कथा हो
मैं तो लघुकथा हूँ
यही सच है।

झूठ

झूठ न बोलो
थोडा‌ सा मुँह खोलो
सच तो बोलो।

तोड़ दिया है

तोड़ दिया है
चूर-चूर करके
तुमने मुझे।

सच या झूठ

सच या झूठ
सही-सही बताओ
न कतराओ।

कागज वाली नाव

सहेजती है
कागज वाली नाव
बचपन को।