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मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

सान्निध्य: आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल



सान्निध्य: आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल: 1- आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल उसको भी सम्‍मान से, करो विदा दे फूल करो विदा दे फूल, सीख लो जाते कल से तोड़ दिये यह भ्रम, बँध...

बुधवार, 18 सितंबर 2013

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: 'आकुल' का लघुकथा संग्रह 'अब रामराज्‍य आएगा !!' का ...

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: 'आकुल' का लघुकथा संग्रह 'अब रामराज्‍य आएगा !!' का ...: 'आकुल' को *भारतीय भाषा रत्‍न* से भी सम्‍मानित किया जाएगा कोटा। फ्रेण्‍ड्स हेल्‍पलाइन, कोटा के सौजन्‍य से प्रकाशित डा0 गोपाल कृ...

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

सान्निध्‍य दर्पण: गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल', कोटा


सान्निध्‍य दर्पण: गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल', कोटा: परिवर्तन की एक नई आधारशिला रखना है  प रि‍वर्तन की एक नई आधारशि‍ला रखना है। न्  याय मि‍ले बस इसीलि‍ए आकाश हि‍ला रखना है। द्र वि‍त...

बुधवार, 19 जून 2013

पत्नी का फोटो

एक दिन दफ्तर में
मेरी एक मात्र पत्नी का
बिना सूचना के आगमन हुआ
उसके चेहरे पर गुस्सा देख
मुझे
तूफान के पहले की
आंधी का आभास हुआ
अचानक
उसका हाव-भाव बदल गया
गुस्से से लाल चेहरा
फूल सा खिल गया
उसका
पाकिस्तान की तरह
इतनी जल्दी बदलाव
मेरी समझ में नहीं आया
जब मैंने इसका कारण पूछा
तो
मुस्कुराकर बोली
हे मेरे प्राणनाथ
मैं आपको कितना गलत समझती थी
आपकी टेबिल पर
सुन्दर फ्रेम में जड़ी हुई अपनी फोटो देखकर
मुझे आज पता चला
आप यूँ ही आहें नहीं भरते हैं
मुझसे कितना प्यार करते हैं 
पति बोला
यह तुम्हारा भ्रम है
टेबिल पर तुम्हारी
फोटो लगाने का तो दूसरा ही कारण है
तुम तो जानती हो कि
मैं जनसम्पर्क अधिकारी हूँ
प्रतिदिन
अच्छे और बुरे लोगों से
मेरा पाला पड़ता है
किसी-किसी दिन तो
लड़ना भी पड़ता है
तब किसी काम में नहीं लगता है मन
इसलिए हो जाती है टेंशन
तुम्हारी
फोटो पास रहेगी तो
यह आभास होगा
क्या
तुमसे भी बड़ा कोई टेंशन होगा
इस तरह
टेंशन की समस्या सुलझ जायेगी
और
मेरी नौकरी आराम से कट जायेगी।

शनिवार, 18 मई 2013

सान्निध्य: इंसान को ही खोजना होगा

सान्निध्य: इंसान को ही खोजना होगा: कल का काम आज ही, हो कैसे सफल। इंसान को ही खोजना, होगा इसका हल।। धूल भरी आँधियाँ, प्रकृति का गुस्‍सा है। सूरज का भी क़हर, पतझड़ ...