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मंगलवार, 4 सितंबर 2018

सान्निध्य: सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: गीतिका शतक 'चलो प्रेम का दूर क्...

सान्निध्य: सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: गीतिका शतक 'चलो प्रेम का दूर क्...: सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: गीतिका शतक 'चलो प्रेम का दूर क्षितिज तक पहुँचाएँ स... : छंद शास्‍त्र की कसौटी पर लिखी सार्थक गीतिकाओं का संग्रह ...

शुक्रवार, 24 जुलाई 2015

सान्निध्य: आईने से क्‍या कोई झूठ बोल सकता है (ग़ज़ल)

सान्निध्य: आईने से क्‍या कोई झूठ बोल सकता है (ग़ज़ल): आईने से क्‍या, कोई झूठ बोल सकता है। बिना चाबी क्‍या, कोई कुफ़्ल 1 खोल सकता है। सच्‍चाई छिपती नहीं सात परदों में भी, तराजू में क्‍...

शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

सान्निध्य: ग़ज़ल

सान्निध्य: ग़ज़ल: रह जाते हैं ज़िंदगी में, अनसुलझे कुछ सवाल अकसर। रह जाते हैं तिश्‍नगी 1 में, अनबुझे कुछ सवाल अकसर। मुसव्विर 2 भी कभी-कभी मुत्‍मईन 3 न...

गुरुवार, 16 जुलाई 2015

सान्निध्य: डा0 रघुनाथ मिश्र 'सहज' पर कुण्‍डलिया छंद

सान्निध्य: डा0 रघुनाथ मिश्र 'सहज' पर कुण्‍डलिया छंद: डा0 रघुनाथ मिश्र *स‍हज* विक्रमशिला हिंदी विद्यापीठ के अधिवेशन में सम्‍मान लेते हुए 1 सागर सा व्‍यक्तित्‍व है, जोश अपार अथाह। जन...

सोमवार, 13 जुलाई 2015

सान्निध्य: निश्‍चय ही सिरमौर, बनेगी अपनी हिन्‍दी (कुण्‍डलिया ...

सान्निध्य: निश्‍चय ही सिरमौर, बनेगी अपनी हिन्‍दी (कुण्‍डलिया ...: 1- हिन्‍दी की बस बात ही, करें न अब हम लोग। मिलजुल कर अब साथ ही, देना है सहयोग। देना है सहयोग, राजभाषा है अपनी। नहीं बनी अब तलक, राष्‍ट...

शनिवार, 11 जुलाई 2015

सान्निध्य: राम से नेह लगाया कर

सान्निध्य: राम से नेह लगाया कर: राम नाम संकीर्तन कर तू, तर जाएगा प्राणी। राम से नेह लगाया कर तू ,  तर जाएगा प्राणी।।  भवसागर से भरा हलाहल, क्‍या बिसात है तेरी। बिना पि...

सान्निध्य: मेरे घर आँगन में गौरैया नित आओ

सान्निध्य: मेरे घर आँगन में गौरैया नित आओ: मेरे घर आँगन में, गौरैया नित आओ।। ढेर परिंडे बाँधे, कई नीड़ बनवाये। विकसित किया सरोवर, कई पेड़ लगवाये। खुशबू से महके घर, मेरा नंदन कान...

सान्निध्य: अकसर लोग कहा करते हैं



सान्निध्य: अकसर लोग कहा करते हैं:     अकसर लोग कहा करते हैं लोक लुभावन मिसरे धूप हवा में धूप बड़ी।   कुछ पंछी स्‍वच्‍छंद विचरते कुछ पिँजरों में कैदी चहका क...

मंगलवार, 5 अगस्त 2014

मित्रों प्रणाम, आप सबके स्नेह से मुझे तुलसी जयंती पर भोपाल के हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में दिनांक 3 अगस्त 2014 को मध्य प्रदेश तुलसी साहित्य अकादमी द्वारा वर्ष 2014 का "तुलसी सम्मान" प्रदान किया गया। संबंधित चित्र संलग्न है। डॉ सुधीर गुप्ता "चक्र" (हास्य-व्यंग्य कवि)

मंगलवार, 1 अप्रैल 2014

मंगलवार, 31 दिसंबर 2013

सान्निध्य: आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल



सान्निध्य: आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल: 1- आगत का स्‍वागत करो, विगत न जाओ भूल उसको भी सम्‍मान से, करो विदा दे फूल करो विदा दे फूल, सीख लो जाते कल से तोड़ दिये यह भ्रम, बँध...

बुधवार, 18 सितंबर 2013

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: 'आकुल' का लघुकथा संग्रह 'अब रामराज्‍य आएगा !!' का ...

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: 'आकुल' का लघुकथा संग्रह 'अब रामराज्‍य आएगा !!' का ...: 'आकुल' को *भारतीय भाषा रत्‍न* से भी सम्‍मानित किया जाएगा कोटा। फ्रेण्‍ड्स हेल्‍पलाइन, कोटा के सौजन्‍य से प्रकाशित डा0 गोपाल कृ...

मंगलवार, 13 अगस्त 2013

सान्निध्‍य दर्पण: गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल', कोटा


सान्निध्‍य दर्पण: गोपाल कृष्‍ण भट्ट 'आकुल', कोटा: परिवर्तन की एक नई आधारशिला रखना है  प रि‍वर्तन की एक नई आधारशि‍ला रखना है। न्  याय मि‍ले बस इसीलि‍ए आकाश हि‍ला रखना है। द्र वि‍त...

बुधवार, 19 जून 2013

पत्नी का फोटो

एक दिन दफ्तर में
मेरी एक मात्र पत्नी का
बिना सूचना के आगमन हुआ
उसके चेहरे पर गुस्सा देख
मुझे
तूफान के पहले की
आंधी का आभास हुआ
अचानक
उसका हाव-भाव बदल गया
गुस्से से लाल चेहरा
फूल सा खिल गया
उसका
पाकिस्तान की तरह
इतनी जल्दी बदलाव
मेरी समझ में नहीं आया
जब मैंने इसका कारण पूछा
तो
मुस्कुराकर बोली
हे मेरे प्राणनाथ
मैं आपको कितना गलत समझती थी
आपकी टेबिल पर
सुन्दर फ्रेम में जड़ी हुई अपनी फोटो देखकर
मुझे आज पता चला
आप यूँ ही आहें नहीं भरते हैं
मुझसे कितना प्यार करते हैं 
पति बोला
यह तुम्हारा भ्रम है
टेबिल पर तुम्हारी
फोटो लगाने का तो दूसरा ही कारण है
तुम तो जानती हो कि
मैं जनसम्पर्क अधिकारी हूँ
प्रतिदिन
अच्छे और बुरे लोगों से
मेरा पाला पड़ता है
किसी-किसी दिन तो
लड़ना भी पड़ता है
तब किसी काम में नहीं लगता है मन
इसलिए हो जाती है टेंशन
तुम्हारी
फोटो पास रहेगी तो
यह आभास होगा
क्या
तुमसे भी बड़ा कोई टेंशन होगा
इस तरह
टेंशन की समस्या सुलझ जायेगी
और
मेरी नौकरी आराम से कट जायेगी।

शनिवार, 18 मई 2013

सान्निध्य: इंसान को ही खोजना होगा

सान्निध्य: इंसान को ही खोजना होगा: कल का काम आज ही, हो कैसे सफल। इंसान को ही खोजना, होगा इसका हल।। धूल भरी आँधियाँ, प्रकृति का गुस्‍सा है। सूरज का भी क़हर, पतझड़ ...

सोमवार, 13 मई 2013

सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: ऐसे रचनाकारों का बहिष्‍कार करें


सान्‍नि‍ध्‍य सेतु: ऐसे रचनाकारों का बहिष्‍कार करें:     ऐसा सुना भी था कि लोग गोष्ठियों में दूसरों की रचना पढ़ कर वाहवाही लूटते हैं। लाइब्रेरी से पुस्‍तकें चुराते हैं। यह उनका जुनून हो सकता ...

शनिवार, 11 मई 2013

सान्निध्य: ममता माँ की


सान्निध्य: ममता माँ की: माँ की आँखों से बहें, गंगा जमुना नीर। कभी न माँ को कष्‍ट दें, फूटे कभी न पीर। फूटे कभी न पीर, हाल हर देवें खुशियाँ। माँ का लें आशीष, ...

सोमवार, 22 अप्रैल 2013

सान्निध्य: मातृभूमि वंदना


सान्निध्य: मातृभूमि वंदना: जननी जन्‍मभूमि भारत माँ, तू है कृपानिधान। शत-शत बार प्रणाम करूँ, रखूँ सदा यह ध्‍यान।। प्रातस्‍स्‍मरणीय मात-पिता-गुरु-जन्‍मभूमि पर मान। ...

सान्निध्य: कैसा ज़ुनून है यह


सान्निध्य: कैसा ज़ुनून है यह: Bangluru Blast  कभी आतंकियों से और कभी दुष्‍कर्मियों से। हैराँ है, पशेमाँ है वतन, इनकी बेशर्मियों से।। कैसा ज़ुनून है यह, कैसी हवा च...